बैंक सर्वर हैक कर 22 करोड़ की साइबर ठगी, अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश

भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेनदेन के साथ साइबर अपराध के मामले भी बढ़ रहे हैं। हाल ही में नोएडा पुलिस ने एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसमें विदेशी नागरिक भी शामिल पाए गए हैं। इस गिरोह ने बैंकिंग सिस्टम की तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस जांच के अनुसार इस मामले में लगभग 22 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन का पता चला है।

कैसे सामने आया पूरा साइबर फ्रॉड नेटवर्क

नोएडा पुलिस की साइबर क्राइम टीम को पिछले कुछ समय से ऑनलाइन बैंकिंग से जुड़े कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन की शिकायतें मिल रही थीं। शुरुआती जांच में पता चला कि कुछ अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधी भारतीय बैंकिंग नेटवर्क को निशाना बना रहे हैं।

जांच के दौरान पुलिस को ऐसे डिजिटल सुराग मिले जो एक अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल की ओर इशारा कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार ये दोनों आरोपी लंबे समय से भारत में रहकर साइबर ठगी के नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।

बैंकिंग सिस्टम की कमजोरी का उठाया फायदा

जांच में सामने आया कि यह गिरोह बैंकिंग सुरक्षा प्रणाली में मौजूद तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर अवैध लेनदेन करता था। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने गुजरात के भावनगर स्थित एक कोऑपरेटिव बैंक से जुड़े ट्रांजैक्शन सिस्टम में हस्तक्षेप कर लगभग 22 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन को अंजाम दिया।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर हैकर्स बैंक सर्वर या ट्रांजैक्शन सिस्टम की सुरक्षा में मौजूद छोटी कमजोरियों को पहचानकर उनका इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद फर्जी खातों या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए पैसे को अलग-अलग जगह ट्रांसफर कर दिया जाता है ताकि उसका पता लगाना मुश्किल हो जाए।

अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह से जुड़े तार

पुलिस जांच में यह भी पता चला कि गिरफ्तार आरोपी एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह न केवल भारत बल्कि अन्य देशों में भी ऑनलाइन ठगी और बैंकिंग फ्रॉड की घटनाओं को अंजाम देता रहा है।

जांच एजेंसियों को आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंक ट्रांजैक्शन से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।

फर्जी कॉल सेंटर के जरिए भी चल रहा था ठगी का खेल

इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पुलिस को पता चला कि कुछ आरोपी फर्जी कॉल सेंटर के जरिए भी लोगों को निशाना बना रहे थे। कॉल सेंटर के माध्यम से लोगों को निवेश, नौकरी या ऑनलाइन कमाई के नाम पर झांसा दिया जाता था।

जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क के खिलाफ हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में साइबर ठगी के मामले दर्ज हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और संगठित तरीके से साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था।

साइबर अपराध के बढ़ते खतरे

डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों के लिए नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग सिस्टम को लगातार अपडेट करना और मजबूत साइबर सुरक्षा उपाय अपनाना बेहद जरूरी है।

भारतीय रिजर्व बैंक और सरकारी एजेंसियां भी समय-समय पर बैंकों को साइबर सुरक्षा से जुड़े दिशा-निर्देश जारी करती रहती हैं। इनका पालन करना और तकनीकी सुरक्षा को मजबूत बनाना वित्तीय संस्थानों के लिए बेहद आवश्यक है।

आम लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए

साइबर अपराध के मामलों को देखते हुए आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान कॉल, ईमेल या मैसेज के जरिए बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए।

अगर किसी व्यक्ति को ऑनलाइन ठगी का संदेह हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके अलावा 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके भी साइबर फ्रॉड की जानकारी दी जा सकती है।

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