उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती और अन्य शिक्षा संबंधी प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों ने एक नई मांग उठाई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और अनियमितताओं को रोकने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली को अनिवार्य किया जाना चाहिए। इस मांग को लेकर प्रतियोगी छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा है।
हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं ने अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। इसी कारण छात्र चाहते हैं कि परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी उपायों को शामिल किया जाए ताकि भर्ती प्रक्रिया पर विश्वास बना रहे।
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद्द होने के बाद उठी मांग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिक्षा सेवा चयन आयोग की विज्ञापन-51 के अंतर्गत आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। इस फैसले के बाद प्रतियोगी छात्रों में परीक्षा प्रणाली को लेकर असंतोष देखने को मिला। अभ्यर्थियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाया जाना जरूरी है।
छात्रों का मानना है कि अगर परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था लागू कर दी जाए तो किसी भी प्रकार की फर्जी उपस्थिति या गलत तरीके से परीक्षा देने की संभावना कम हो जाएगी। इससे भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी और योग्य उम्मीदवारों को उचित अवसर मिलेगा।
टीजीटी और पीजीटी भर्ती परीक्षाओं में भी लागू करने की मांग
प्रतियोगी छात्रों ने यह भी कहा है कि केवल असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) और प्रवक्ता (PGT) भर्ती सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
उनका कहना है कि राज्य में लाखों अभ्यर्थी इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और कई वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। यदि बायोमेट्रिक या रेटिना स्कैन जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है तो परीक्षा में होने वाली अनियमितताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की भी मांग
अभ्यर्थियों ने आयोग से यह भी आग्रह किया है कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि परीक्षार्थियों के प्रवेश के समय बायोमेट्रिक सत्यापन या आंख की पुतली (रेटिना) स्कैन के माध्यम से पहचान सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इसके अलावा परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ओएमआर शीट एकत्र करने से लेकर उन्हें स्ट्रॉन्ग रूम में जमा करने तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने की भी मांग की गई है। इससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम हो जाएगी।
हर परीक्षा केंद्र पर जैमर लगाने का सुझाव
छात्र प्रतिनिधियों ने परीक्षा केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दुरुपयोग को रोकने के लिए जैमर लगाने का सुझाव भी दिया है। उनका कहना है कि जैमर लगाए जाने से मोबाइल नेटवर्क या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए होने वाली नकल या पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।
इसके साथ ही प्रश्नपत्र वितरण की पूरी प्रक्रिया को स्टेटिक मजिस्ट्रेट की निगरानी में कराने की मांग भी की गई है, ताकि परीक्षा की विश्वसनीयता बनी रहे।
अभ्यर्थियों ने आयोग को सौंपा ज्ञापन
प्रतियोगी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपते हुए इन सभी मांगों पर विचार करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
प्रतिनिधिमंडल में कई छात्र नेता और प्रतियोगी अभ्यर्थी शामिल थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि आयोग भविष्य में आयोजित होने वाली परीक्षाओं में तकनीकी सुरक्षा उपायों को शामिल करेगा।
परीक्षा प्रणाली में तकनीक का बढ़ता महत्व
देश के कई राज्यों और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पहले से ही बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल निगरानी जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इससे परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में काफी मदद मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्तर प्रदेश में भी इन तकनीकों को बड़े स्तर पर लागू किया जाता है तो भर्ती परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। साथ ही इससे योग्य अभ्यर्थियों का भरोसा भी मजबूत होगा।